यदि कोई यह जानने का इच्छुक है कि वह पापी है या नहीं तो यह कोई मुश्किल काम नहीं है। बस उसे हिमाचल प्रदेश के लाहुल-स्पीति जिले में स्थित त्रिलोकनाथ मंदिर में जाना होगा।
जिला मुख्यालय केलंग से करीब 40 किलोमीटर दूर तूंदे इलाके में स्थित त्रिलोकनाथ मंदिर के मुख्य द्वार पर पत्थर के दो खंभे हैं। मान्यता है कि ये खंभे स्वर्ग व नर्क का द्वार हैं। धर्म-अध्यात्म में गहरी आस्था रखने वाले लोगों का विश्वास है कि जो व्यक्ति खंभे को आसानी से पार कर जाता है, उसने पुण्य किए हैं और वह पापी नहीं है। वहीं जो आदमी खंभे में फंस जाता है, वह पापी है। मान्यता के अनुसार जो पापी नहीं है, वह मरने के बाद स्वर्ग जाएगा और जो आदमी खंभे में फंस जाता है, वह नर्क भोगेगा। यही परीक्षण करने के लिए कई श्रद्धालु हर वर्ष त्रिलोकनाथ मंदिर आते हैं। सत्य व धर्म की राह पर चलने वाला व्यक्ति चाहे वह पतला हो या मोटा, खंभों के बीच में से आसानी से निकल जाता है। अविश्वसनीय रूप से कई बार पतले व्यक्ति भी खंभों के बीच फंस जाते हैं। ऐसे लोग बुरे कर्मो को त्यागने का प्रण लेकर घर लौटते हैं।
हिंदू-बौद्ध नवाते हैं शीश
मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि इसमें प्राचीन काल से हिंदू व बौद्ध धर्म में आस्था रखने वाले लोग एक साथ अपनी-अपनी पूजा पद्धति से शीश नवाते हैं। हिंदुओं का दावा है कि मंदिर में मूर्ति शिव की है। वहीं, बौद्ध धर्म के श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान अवलेकितेश्वर को समर्पित है। मंदिर के पुजारी लामा नोरसेल ने बताया कि उन्हें यहां रहते करीब 20 साल हो गए हैं। उन्होंने खंभों में ऐसे कई लोगों को अटकते देखा जो काफी दुबले-पतले थे। जबकि कई मोटे लोग खंभों के बीच से आसानी से गुजर जाते हैं।
दूरदराज से आते हैं श्रद्धालु
स्थानीय निवासी शेर सिंह, सुरेंद्र ठाकुर, अमर लाल आदि ने बताया कि दूरदराज इलाकों से श्रद्धालु खंभे पार करने आते हैं। दिल्ली से आए नवविवाहित जोडे निधि सागर व सुशांत ने बताया कि जब वे खंभे को पार कर रहे थे, तो अजीब-सा डर लग रहा था। निधि ने बताया कि वह खंभे को पार करते समय फंस गई जबकि वह काफी पतली हैं। इसके बाद उन्होंने प्रण किया कि वह अब किसी के साथ बुरा व्यवहार नहीं करेंगी
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